एक बार मैंने किसी बुक में पढ़ा था, कि लड़की से बदला लेना बहुत आसान
है. ज्यादा कुछ न करें और बस इतना कह दें कि ‘वो लड़की चरित्रहीन है’ बस
इतना ही काफी है, बात फैलेगी और लड़की शर्म से खुद ही मर जाएगी. समय बीतने
के साथ किताबों के कई पन्ने आंखों के आगे से निकल गए, लेकिन यह पंक्ति मुझे
आज भी याद है. ऐसे कई मौके भी आए जब मुझे इस पंक्ति का अर्थ समझ में आया.
भले ही हम कितना कह लें कि हमें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन अपने बारे में
अनाप-शनाप सुनकर कोई लड़की परेशान न हो ऐसा हो ही नहीं सकता. सबके सामने
खुद को सही साबित करना, परिवार की नजरों में अपने ‘गलत’ न होने की गवाही
देना और ऐसे ही न जाने कितने सर्टिफिकेट हासिल करने की कोशिश….यह सब एक
लड़की की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है. कभी अपनी इज्जत, कभी मां-बाप की
इज्जत तो कभी ससुराल की इज्जत को बचाने की दुहाई, कई बार लगता है कि लड़कों
के लिए ‘इज्जत’ जैसा शब्द बना ही नहीं है. कुछ दिन पहले की बात है मेरे एक
परिचित का फोन आया. सामान्य बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि तुम्हारी शादी
की कहीं बात चल रही है क्या, लड़के के फलां-फलां रिश्तेदार हमारे परिचित
हैं. उन्होंने तुम्हारे चाल-चलन के बारे में पूछा तो हमने कहा कि झट से
‘हां’ कर दीजिए’ मुझे बुरा तो लगा, लेकिन अब इस बुरेपन को झेलने की आदत हो
गई है, जैसे हमें पसंद करके किसी ने हम पर बहुत बड़ा अहसान किया हो और अगर
हमारे बारे में कुछ ऐसा-वैसा बक दिया गया होता तो हमारी इमेज पर थू-थू
होने लगती. गुस्सा भी बहुत आया कि शादी-ब्याह के मामले में क्या कोई लड़की
‘प्रोडक्ट’ होती है कि जगह-जगह जाकर उसके चरित्र को सत्यापित कराते रहें.
जो लोग अपने बेटों की बुराईयों पर पर्दा डालते रहते हैं, उन्हें भी बहू के
रूप में एक सती-सावित्री लड़की चाहिए. लड़के की किसी बुरी आदत पर टिप्पणी
करो तो घरवालों का एक ही रट्टा होता है ‘वो लड़का है’. लड़का है तो क्या
‘चरित्र’ नाम का लेबल उस पर चस्पा नहीं होता. कॉलेज के दिनों में मेरी एक
फ्रेंड हुआ करती थी. वो आदर्श बेटी और बहू के सभी पैमानों पर खरी उतरती है.
बावजूद इसके उसे इसलिए हमेशा रिजेक्ट किया जाता रहा कि वो गोरी नहीं है.
कुछ दिन पहले उसका रिश्ता तय हुआ. उसने बताया कि लड़के की हाइट ज्यादा नहीं
है न ही वो हैंडसम है. यही नहीं मेरी फ्रैंड के जितना पढ़ा-लिखा भी नहीं
है, बावजूद इसके उसने लड़को को पसंद करने की कई वजहें गिनाई. उसे इस बात से
भी परेशानी नहीं हुई कि लड़का बेरोजगार है. अगर मेरी फ्रैंड की जगह कोई
लड़का होता तो लड़की के रंग, चरित्र, पढ़ाई-संस्कार संबंधी कोई न कोई
मीन-मेख निकालकर रिजेक्ट करने के बहाने ढूंढ ही लेता, क्योंकि सर्वगुण
संपन्न होने की शर्त केवल लड़कियों के लिए ही है.

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