एक भोली भाली भली सी... प्यारी सी लड़की... अपनी खिलखिलाहट से अँधेरा रौशन कर देने वाली लड़की... अपनी उदासी से हवाओं को भी उदासी का ही कोई नगमा डूब कर गाने को प्रेरित कर देने वाली लड़की... अपने विशुद्ध पागलपन में कुछ कुछ मेरे जैसी लेकिन अपनी विशिष्टताओं में केवल और केवल अपने जैसी, अकेली और अनूठी लड़की... कलम से हर बार चमत्कृत कर देने वाली रचनात्मकता का प्रतिबिम्ब- मेरे लिए यही तो है न परिचय लहरें वाली पूजा का!
बहुत दिनों से इस प्यारी सी लड़की के लिए बहुत कुछ लिखने का मन था... लेकिन जो हम करना चाहते हैं जो हम कहना चाहते हैं वह हमेशा हो ऐसा संभव तो नहीं... पता नहीं आज भी लिख जाएगा वह कुछ या नहीं या लिख भी गया तो प्रेषित हो पायेगा या नहीं...
एक दिन यूँ ही ढ़ेर सारी उदासी घेरे हुए थी... कोई ऐसा नहीं था जिससे बात की जाए... जिसके पास बस यूँ ही फ़ोन घुमा दिया जाए तभी कहीं से एक हवा के झोंके सी वह आई और परिचय का गहरा रंग लगाती हुई उड़ गयी...! तारीख़ भी कुछ ऐसी ही थी... कभी कभार आने वाली... २९ फ़रवरी! लेकिन उस दिन पहली बार बात करते हुए ही ये एहसास पक्का हो गया कि ये रंग अब हमेशा रहेगा मेरे जीवन में! लहरें आती जाती ये सुदूर तट अवश्य छूती रहेंगी और प्रतिविम्ब सा कुछ कुछ हर बार किनारों को लौटते हुए देती जायेंगी!
बहुत सारी यहाँ वहाँ की बातों के बीच उसकी खनकती हुई आवाज़ मेरी निधि बन गयी और एक प्यारी सी दोस्त से पुराना सा परिचय जान पड़ा भले बात पहली बार हुई हो...! कुछ एक परिचय ऐसे ही होते हैं, उनका होना ऐसा होता है जैसे नीरव अन्धकार में चमकता एक ध्रुवतारा! रिश्ते, भाव और एहसासों का आकाश ऐसा ही होता है... कल्पना सा सुन्दर पर यथार्थ की ठोस ज़मीन पर कड़ी धूप में खिलखिलाता हुआ भी... तभी तो इनसे बड़ा सत्य कुछ और नहीं होता!
बात करते हुए ऐसा लगा ही नहीं कि पहली बार बात कर रहे हैं...
पूजा, देखना कहीं किसी दिन ढ़ेर सारी डार्क चोक्लेट्स के साथ तुम्हारे दरवाज़े पर दस्तक देने न पहुँच जायें... जितनी दूर हैं ऐसा संभव तो नहीं जान पड़ता लेकिन कौन जाने सच भी हो जाए... आखिर संभावनाओं का नाम ही तो जीवन है!
मिलते ही लगा, कि
अपनी है
जीवन इसकी आखों में
अर्थ नया पाता है!
'लेखनी की पूजा में ध्यानस्थ छवि'
देख इसे
शब्द स्वयं
संवर जाता है!!

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