लोक सेवा का वास्तविक तात्पर्य जनहित तथा लोक कल्याण के उद्देश्य से उत्तरदायित्वपूर्णकार्यकलापों द्वारा निरूपित होता है। समाज की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत सामान्य विचारों को लेकर जनता की हित साधना के प्रयोजन से कल्याणकारी कार्य करना चाहे वे नियोजित हो अथवा नहीं लोकसेवा के नैतिक स्वरूप की अभिव्यक्ति करते है। लोकसेवा वस्तुत:परमार्थ की भावना से उद्वेलित होनी चाहिए।सेवा का अर्थ अपने से पृथक अन्य मानव की भलाई, उत्थान, विकास, उन्नति एवं सुख के लिए प्रयासरत रहने से होता है।