मैं ना तो लेखक का लेख हूँ, ना कवि की कविता, ना दार्शनिक का दर्शन, वेश्या
का नृत्य, कमजोर व्यक्ति का प्रयास या किसी बच्चे की अनर्गल हरकत, जो किसी
तारीफ या इनाम या पसंद या ध्याकर्षन और उसको बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील हो|
मैं तो सभी को जीतने या यूँ कहा जाए सभी को जिताने वाला एक पूर्व
निर्धारित तथा लोगों की ज़रूरत की पूर्ति और समस्या के निदान के अनुसार
सदैव नया रहने वाली व्यवस्था हूँ जो अपने विहित दायित्वों को पूरा करने मे
हर तरह से समर्थ भी हूँ| मुझे समझकर या मेरे उपयोग से कोई भी कमजोर
व्यक्ति कुछ भी असंभव से असंभव कार्य कर सकता है| फिलहाल इसे वैचारिक,
सैद्धांतिक, व्यवहारिक, रूप से लिख कर सिद्ध करने के लिए मैं व्यक्तिगत रूप
से उपस्थित भी हूँ| लोगों की ज़रूरतों की पूर्ति या समस्याओ के निदान हेतु
कुछ करना चाहता था उसके लिए बनाए गये एक कार्यक्रम के विचारों की
व्यवस्थित और लिखित अभिव्यक्ति हिंदुत्व के दर्शन से मेल खाते थे सो उसके
लिए अलग से शब्दो को बनाने के बजाए उन्ही शब्दों का उपयोग कर लिया है| मेरे
द्वारा लिखे गये लेख भविष्य मे किए जाने वाले किसी विशिष्ट कार्य के
हिस्से है, कोई पंडित, गयानी, गुरु मिला नही इसलिए अपनी कमियों को ढूँढने
के लिए सार्वजनिक कर दिया तो समझ मे आया की विरोधी ही सबसे अच्छे गुरु भी
होते हैं| इसलिए केवल विरोधियों की कृपा के लिए ही सादर समर्पित|
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